GONDIA: ‘साहाब! लाभार्थी किसान जिएं या मरें?’

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8 साल से नरेगा के 300 करोड़ अटके, 3 हजार से अधिक किसान कुएं-गोठे के अनुदान को तरसे; चारों विधायकों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

प्रतिनिधि, गोंदिया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत सिंचाई कुएं, पशु गोठे और फलबाग जैसी योजनाओं का लाभ लेकर आर्थिक समृद्धि का सपना देखने वाले गोंदिया जिले के हजारों किसानों के सामने अब गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरपंच संघ के अनुसार वर्ष 2018 से अब तक जिले के 3 हजार से अधिक लाभार्थी किसानों को उनके स्वीकृत कार्यों का अनुदान नहीं मिल पाया है। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक विकास कार्यों से संबंधित करीब 300 करोड़ रुपये की देनदारियां भी लंबे समय से लंबित हैं। ऐसे में कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की स्थिति को लेकर गोंदिया जिला सरपंच संघ ने तीखा सवाल उठाया है—‘साहेब! इन लाभार्थी किसानों ने जिएं या मरें?’

गोंदिया जिला सरपंच संघ के प्रतिनिधिमंडल ने जिले के चारों विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों से मुलाकात कर मनरेगा निधि के अभाव में किसानों, ग्राम पंचायतों, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं और संबंधित कार्य एजेंसियों के सामने पैदा हुए संकट की जानकारी दी। प्रतिनिधिमंडल ने गोंदिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक विनोद अग्रवाल, आमगांव-देवरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजय पुराम, गोरेगांव-तिरोड़ा विधानसभा क्षेत्र के विधायक विजय रहांगडाले तथा अर्जुनी मोरगांव विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजकुमार बडोले से मुलाकात कर राज्य सरकार से तत्काल लंबित निधि जारी कराने की मांग की।

संघ का कहना है कि वर्षों से भुगतान नहीं होने के कारण लाभार्थी किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। कई किसानों ने योजनाओं के तहत काम पूरा करने के लिए अपनी ओर से खर्च किया अथवा उधारी और कर्ज का सहारा लिया, लेकिन निर्धारित अनुदान का भुगतान नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है। दूसरी ओर ग्राम पंचायतों के सार्वजनिक विकास कार्यों की करीब 300 करोड़ रुपये की देनदारियां लंबित रहने से ग्रामीण विकास की गति भी प्रभावित हो रही है।

सरपंच संघ के मुताबिक मनरेगा के कामों पर मस्टर लॉक होने से नए कार्यों पर भी ब्रेक लगा है। इससे न केवल ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्य प्रभावित हुए हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसरों पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है। सामग्री आपूर्तिकर्ता, लाभार्थी किसान और अन्य संबंधित लोग भुगतान के लिए लगातार सरपंचों पर दबाव बना रहे हैं। ऐसे में ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने भी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है।

संघ ने इससे पहले जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांगों का ज्ञापन भेजकर 15 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया था। अब चारों विधायकों से मांग की गई है कि वे मुख्यमंत्री तथा मनरेगा विभाग के संबंधित मंत्री के समक्ष जिले की लंबित निधि का मुद्दा एकजुट होकर उठाएं और किसानों एवं ग्राम पंचायतों के भुगतान का तत्काल समाधान कराएं। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं हुआ तो जिला परिषद के समक्ष ठिय्या आंदोलन किया जाएगा।

सरपंच संघ ने लंबित करीब 300 करोड़ रुपये की मनरेगा देनदारियां तत्काल अदा करने, प्रशासक के रूप में कार्यरत सरपंचों को नियमित सरपंचों की तरह पूर्ण अधिकार देने तथा जल जीवन मिशन के तहत लंबित जलापूर्ति योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने सहित विभिन्न मांगें रखी हैं।

इस दौरान जिला सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रकुमार बहेकार, मार्गदर्शक गंगाधर परशुरामकर, विदर्भ उपाध्यक्ष महेंद्र भांडारकर, महिला जिलाध्यक्ष वर्षा पटले, जिला उपाध्यक्ष मनीष गहेरवार, तिरोड़ा तालुकाध्यक्ष विनोद लिल्हारे, गोरेगांव तालुकाध्यक्ष नरेंद्र चौरागडे, अर्जुनी मोरगांव तालुकाध्यक्ष भोजराज लोगडे, देवरी तालुकाध्यक्ष मनोहर राऊत, सचिव कैलाश मरसकोल्हे, लक्ष्मीशंकर मरकाम, आमगाव तालुकाध्यक्ष मुकेश शिवणकर, खेमेंद्र रिनायित, कुलदीप पटले, लक्ष्मीकांत नाकाडे, सुरेंद्र परतेती, कैलास साखरे, सचिन मेश्राम, योगेश पटले, विद्या ठाकूर, शकुंतला कटरे, सरोजिनी दांदरे, नरेंद्र लंजे, बन्सीधर लंजे, संजय ईश्वरकर, घनश्याम शहारे, मोहिनी वऱ्हाडे, श्यामकला मेंढे, संतोष सतीशहारे सहित विभिन्न पदाधिकारी, सरपंच, प्रशासक और जिले के अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।

‘यह कैसा किसान सम्मान?’

एक ओर सरकार किसान सम्मान की योजनाओं और ग्रामीण विकास की प्रतिबद्धता की बात करती है, वहीं दूसरी ओर मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों का अनुदान वर्षों तक नहीं मिलने से किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सरपंच संघ का कहना है कि यदि शासन की योजनाओं पर भरोसा करके काम पूरा करने वाले लाभार्थियों को 6 से 8 वर्षों तक भुगतान के लिए प्रतीक्षा करनी पड़े और वे कर्ज के बोझ तले दबते जाएं, तो इसे किसान सम्मान कैसे कहा जाए? अब यही सवाल जिले के सरपंचों के साथ किसान भी उठाने लगे हैं।

मुख्य मांगें: लंबित मनरेगा भुगतान तत्काल जारी हो • किसानों के बकाया अनुदान का भुगतान हो • ग्राम पंचायतों की करीब 300 करोड़ रुपये की देनदारियां चुकाई जाएं • मस्टर लॉक की समस्या दूर कर नए रोजगार कार्य शुरू किए जाएं • जल जीवन मिशन की लंबित योजनाएं पूर्ण की जाएं • प्रशासक सरपंचों को नियमित सरपंचों के समान अधिकार दिए जाएं।

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